नवभारत टेक डेस्क: भारत में डिजिटल पेमेंट का पर्याय बन चुकी UPI सेवा इन दिनों सुर्खियों में है। 12 अप्रैल को Paytm, GPay और PhonePe जैसे बड़े ऐप्स से पेमेंट फेल होने लगे, जिससे यूजर्स हैरान रह गए। सवाल उठता है कि जब देश में हर घंटे ढाई करोड़ से अधिक UPI ट्रांजैक्शन हो रहे हैं, तो यह सेवा बार-बार डाउन क्यों हो रही है?
तीन बार डाउन हुई UPI: 15 दिनों में बढ़ी समस्याएं
- 26 मार्च 2025: तीन घंटे तक सेवा बाधित रही, 10 से ज्यादा बैंकों की UPI और नेटबैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ा।
- 2 अप्रैल 2025: वित्तीय वर्ष की क्लोजिंग के चलते SBI सहित कई बैंकों की मोबाइल बैंकिंग प्रभावित हुई।
- 12 अप्रैल 2025: सुबह 11:30 से लेकर दोपहर 3 बजे तक यूजर्स को पेमेंट, फंड ट्रांसफर और शॉपिंग में दिक्कत आई।
UPI बार-बार क्रैश क्यों हो रहा है?
NPCI के अनुसार तकनीकी समस्याएं मुख्य वजह हैं। परंतु कुछ अन्य कारण भी सामने आए हैं:
- IPL सीजन में गेमिंग ऐप्स पर ट्रांजैक्शन बढ़ने से सर्वर पर भारी लोड।
- फरवरी में 1610 करोड़ ट्रांजैक्शन की तुलना में मार्च में यह संख्या 1830 करोड़ पहुंच गई।
- इंटरनेशनल QR कोड ट्रांजैक्शन को सीमित करने के चलते बैकएंड पर काम चल रहा है।
- कुछ मामलों में समस्या बैंकों के सर्वर से जुड़ी होती है, जैसे SBI, HDFC आदि।
भविष्य में भी डाउन हो सकती है UPI सर्विस?
हां, जब तक NPCI और RBI की तरफ से सिस्टम को और सशक्त नहीं किया जाता, ऐसी रुकावटें आ सकती हैं। हालांकि, UPI लाइट और इंटरनेशनल फीचर्स पर काम जारी है, जिससे ऐसी समस्याएं भविष्य में कम होंगी।
पेमेंट अटक जाए तो घबराएं नहीं
अगर आपका ट्रांजैक्शन पेंडिंग है, तो पैसा या तो रिसीवर के खाते में जाएगा या आपके खाते में वापस आ जाएगा। अधिकतम 72 घंटे लग सकते हैं। डबल पेमेंट से बचने के लिए ट्रांजैक्शन क्लियर होने तक इंतजार करें।
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क्या बैंक में रखा पैसा सुरक्षित है?
बिलकुल। UPI सर्विस डाउन होने से आपके बैंक अकाउंट की सिक्योरिटी पर कोई असर नहीं पड़ता। बिना UPI पिन के ट्रांजैक्शन संभव नहीं।
UPI कैसे करता है काम?
UPI के ज़रिए बस एक QR कोड या मोबाइल नंबर से तुरंत पैसे भेजे जा सकते हैं। NPCI इस पूरे सिस्टम को मैनेज करता है, जो एक बैंक से दूसरे बैंक में ट्रांजैक्शन को सुरक्षित और रियल-टाइम में पूरा करता है।
UPI की ग्लोबल धूम
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युल मैक्रों ने खुद जयपुर में PM मोदी के साथ UPI से चाय का पेमेंट किया। भूटान, UAE, कतर और फ्रांस जैसे देश पहले ही UPI को अपना चुके हैं। जापान और ब्रिटेन भी रुचि दिखा चुके हैं।
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